अजंता की गुफाएं है भारत की सबसे रहस्यमय जगह

अजंता की गुफाएं(Ajanta Caves) भारत में महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है अजंता की गुफाएं(Ajanta Caves) तकरीबन 29 चट्टानों को काट कर बनाई गयी है, अजंता की  गुफाओं (Ajanta Caves) को देखकर पता चलता है की सभी गुफाएं बौद्ध धर्म से तलूक रखती है ,यहाँ बौद्ध धर्म से सम्बन्धित चित्र और शिल्पकारी के नमूने मिलते हैं

औरंगाबाद जिले में नैशनल ज्यॉग्राफिक के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है, जैसे शताब्दियों तक अजंता समेत, लगभग सभी बौद्ध मंदिर, हिन्दू राजाओं के शासन के खिलाफ बनवाये गये थे , अजंता की गुफाएँ(Ajanta Caves) एक घने जंगल में , अश्व नाल आकार घाटी में अजंता गाँव से ३ किलो मीटर दूर बनी हुई है , अजंता में कुल 29 गुफाएं हैं, अजंता की अंतिम गुफा को 1956 में ही खोजा गया था

 

..अजंता की पहली गुफा

पहली गुफा अश्वनाल आकार की ढाल पर पूर्वी में है। स्पिंक के अनुसार इस स्थल पर बनी आखरी गुफाओं में से एक है और वाकाटक चरण के समाप्ति की ओर है। हालाँकि कोई शिलालेखित बिलकुल ठीक समझ नहीं आते हैं; फिर भी यह माना जाता है कि वाकाटक राजा हरिसेना इस उत्तम संरक्षित गुफा के संरक्षक रहे हों। इसका प्रबल कारण यह है कि हरिसेना आरम्भ में अजंता के संरक्षण में सम्मिलित नहीं था, किन्तु लम्बे समय तक इनसे अलग नहीं रह सका, क्योंकि यह स्थल उसके शासन काल में गतिविधियों से भरा रहा और उसकी बौद्ध प्रजा को उस हिन्दू राजा का इस पवित्र कार्य को आश्रय देना प्रसन्न कर सकता था। अपनी छवि बनाये रखने के लिए वह धर्म से जुड़ा रहा था

अजंता (Ajanta Caves) की  दूसरी गुफा में बहुत सुन्दर नक्काशी कार्य किया गया है, जिसमें कई अति उभरे हुए चित्र और मुर्तिया भी हैं। यहाँ बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित कई घटनाएँ अंकित हैं, साथ ही अनेक अलंकरण नमूने भी हैं। इसका द्वि-स्तंभी द्वार-मण्डप, जो उन्नीसवीं शताब्दी तक का दृश्य था (तब के चित्रानुसार), वह अब लुप्त हो चुका है। इस गुफा के आगे एक खुला स्थान था, जिसके दोनों ओर खम्भेदार गलियारे थे। इसका स्तर अपेक्षाकृत ऊँचा था।

इसके द्वार मण्डप के दोनों ओर कोठियाँ हैं। इसके अन्त में खम्भेदार प्रकोष्ठों की अनुपस्थिति बताती है कि यह मण्डप अजंता के अन्तिम चरण के साथ नहीं बना था, जब कि खम्भेदार प्रकोष्ठ एक नियमित अंग बन चुके थे। पोर्च का अधिकांश क्षेत्र कभी मुराल से भरा रहा होगा, जिसके कई अवशेष अभी भी शेष हैं। यहाँ तीन द्वार पथ हैं, एक केन्द्रीय व दो किनारे के। इन द्वारपथों के बीच दो वर्गाकार खिड़कियाँ तराशी हुई है, जिनसे गुफाओ में उजाला होता था

…अजंता की दूसरी गुफा

अजंता (Ajanta Caves)की दूसरी गुफा की दीवारों पर और छतों एवं स्तम्भों पर संरक्षित अपनी चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है। यह अत्यन्त ही सुन्दर दिखती है और पहली गुफा से लगभग समान ही दिखती है, किन्तु संरक्षण बेहतर स्थिति में है।
दूसरी गुफा में दो द्वार-मण्डप हैं, जो कि पहली गुफा से बहुत अलग है। बल्कि फलकों की नक्काशी भी उससे अलग दिखती है। इस गुफा को अच्छे खासे दो मोटे स्तम्भ से सहारा दिया हैं, जो की भारी नक्काशी से अलंकृत हैं। आकार, नाप एवम् भूमि योजना में यह पहली गुफा से काफी मिलती है।

सामने का पोर्च दोनों ओर स्तम्भों से युक्त है। पूर्व में जगह छोड़े स्थानों पर बने कमरे होने पर बाद में स्थान की आवश्यकता न हो इसलिए बने है , क्योंकि बाद में आवास की अधिक आवश्यकता बढ़ी। सभी बाद की वाकाटक निर्माणों में, पोर्च के अन्त में कक्ष आवश्यक अंग बन गये। अजंता गुफाओं (Ajanta Caves) की  छतों और दीवारों पर बने भित्ति चित्रों का पर्याप्त मात्रा में प्रकाशन हुआ है। इनमें बुद्ध के जन्म से पूर्व बोधिसत्व रूप के अन्य जन्मों की कथाएँ हैं। पोर्च की पीछे की दीवार के बीच एक द्वार-पथ है, जिससे महाकक्ष (हॉल) में प्रवेश होता है। द्वार के दोनों ओर वर्गाकार चौड़ी खिड़कियाँ हैं जो रौशनी उपलब्ध कराती हैं जिससे सुन्दरता एवम् सम्मिति बन जाती है

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