नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों जलाया था बख्तियार खिलजी ने

लगभग छठी सदी के ई.पू. में नालंदा ही ऐसा स्थान था जंहा शिक्षा दी जाती थी, जापान, कोरिया, चीन, तिब्बत,और तुर्की से यहां छात्र और शिक्षक पढ़ने और पढ़ाने के लिए आया करते थे, नालंदा विश्वविद्यालय में लगभग 10,000 छात्र पढ़ने के लिए और 2000 शिक्षक पढ़ाने के लिए थे, यहां पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र विदेशी थे, छठी शताब्दी में हिंदुस्तान सोने की चिडिया कहलाता था। यह सुनकर यहां मुस्लिम आक्रमणकारी हिंदुस्तानपर आक्रमण करते रहते थे , इन्हीं में से एक था- तुर्की का शासक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी। उस समय हिंदुस्तान पर खिलजी का ही राज था। नालंदा विश्वविद्यालय तब राजगीर का एक उपनगर हुआ करती थी। यह राजगीर से पटना को जोड़ने वाली रस्ते पर स्थित है

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम ने 450-470 ई. के बीच की थी। नालंदा विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना थी। इसका पूरा कैम्पस एक बड़ी दीवार से घिरा हुआ था जिसमें आने-जाने के लिए एक मुख्य दरवाजा था। उत्तर से दक्षिण तक की ओर मठों की कतार थी और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे। मंदिरों में भगवान बुद्ध की मूर्तियां थीं। नालंदा विश्वविद्यालय की सेंट्रल बिल्डिंग में 7 बड़े और 300 छोटे कमरे थे, जिनमें भाषण हुआ करते थे।

मठ एक से अधिक मंजिल के थे। हर मठ के आंगन में एक कुआं बना था। 8 बड़ी इमारत , 10 मंदिर, कई प्रार्थना घर और अध्ययन कक्ष के अलावा इस कैम्पस में सुंदर बगीचे और झीलें भी थीं। नालंदा को हिंदुस्तानी राजाओं के साथ ही विदेशों से भी आर्थिक मदद मिलती थी। नालंदा विश्वविद्यालय का पूरा प्रबंध कुलपति या प्रमुख आचार्य करते थे जिन्हें बौद्ध भिक्षु चुनते थे।

मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां साल भर शिक्षा ली थी। यह विश्व की ऐसी पहला विश्वविद्यालय था, जहां रहने के लिए छात्रावास भी थे। महायान बौद्ध धर्म के इस विश्वविद्यालय में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ ही दूसरे धर्मों की भी शिक्षा दी जाती थी।

इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी का मानना था की नालंदा के हिंदुस्तानी वैद्य इलाज करने में सफल हो रहे थे परन्तु इस्लामिक धर्म के लोग इस कारण पीछे हो रहे थे , दुनिया भर से छात्र वंहा पढ़ना व् इलाज़ करना सीखते थे इस बात को लेकर बख्तियार खिलजी के मन में नालंदा को लेकर ऐसी जलन उठी के उसने नालंदा का सर्व नाश करने की सोच ली इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नालंदा को तहस-नहस कर दिया, कहा जाता है कि खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय में आग लगाने का आदेश दे दिया था । सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि यह तीन महीने तक जलता रहा। इसके बाद भी खिलजी का मन शांत नहीं हुआ। उसने नालंदा के हजारों धार्मिक नेताओं और बौद्ध भिक्षुओं की भी हत्या करवा दी। बाद में पूरे नालंदा को भी जलाने का आदेश दे दिया।

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